भगवान छप्पर फाड़ कर देता है (बच्चों की कहानियां) | Moral Kids Story in Hindi

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Moral Kids Story in Hindi (भगवान छप्पर फाड़ कर देता है) : दोस्तों! आज हम आप साथ शेयर कर रहे हैं, एक बेहतरीन “शिक्षाप्रद हिंदी कहानी”. इस कहानी को मैंने खासतौर पर बच्चों के लिए लिखा है. अगर सीधे शब्दों मैं कहूं तो आप इसे “बच्चों की कहानी” भी कह सकते हैं. तो चलिए चलते हैं “Kids Story in Hindi” की तरफ और मनोरंजन के साथ प्रयास करते हैं कुछ नया सीखने का.

Kids Story in Hindi – भगवान देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है

एक गांव में रामू नाम का एक सीधा-सादा गरीब किसान रहता था. उसका हर काम भगवान भरोसे चलता था. एक बार वह एक गाय बेचने के लिए हाट में जा रहा था. रास्ते में वह आराम करने के लिए एक पेड़ के नीचे रुका. और गाय को पेड़ से बांध कर पेड़ के नीचे आराम करने के लिए लेट गया.

तभी एक गिरगिट पर उसकी नजर पड़ी. गिरगिट ने अपने स्वभाव के अनुसार अपनी मुंडी ऊंची-नीची करने लगा. रामू ने समझा कि यह मेरे मन की बात को ताड़ गया है और यह गाय खरीदना चाहता है. यही सोचकर उसने गिरगिट से कहा – “क्यों रे क्या है?”

गिरगिट ने अपने स्वभाव के अनुसार मुंडी फिर हिलाई. रामू ने अर्थ लगाया कि यह गाय लेने का इशारा कर रहा है.
रामू बोला – “गाय लेगा, 30 रुपए की है.”

गिरगिट ने फिर मुंडी हिलाई. रामू समझा कि यह “हां” कह रहा है.  रामू ने सोचा कि “हाट-बाजार में कहाँ भटकता रहूंगा? गाय इसे ही बेच देता हूं.”

रामू ने पूछा – “आज रुपये देगा या कल?” गिरगिट ने फिर मुंडी हिलाई. उसने जो समझा वह यह था – “अच्छा कल देगा, चलो कोई बात नहीं भाई, कल दे देना.”  फिर वह गाय को वहीं छोड़ कर घर की तरफ लौट आया.

रामू घर आया तो उसकी पत्नी ने पूछा – “क्या गाय बेच आए? कितने रुपए में बिकी? लाओ पैसे दे दो?”  इतने प्रश्नों के उत्तर में रामू ने कहा – “एक गिरगिट को 30 रुपये में बेच दी है. पैसे कल देगा.”

उसकी पत्नी ने पूरी बात सुनी तो वह दंग रह गई. वह बोली – “तुम पागल तो नहीं हो गए हो? कहीं गिरगिट भी गाय खरीदते हैं? और वह पैसे कैसे देगा?” घर के दूसरे लोगों को जब मालूम पड़ा, तो उन्होंने उसे खूब खरी-खोटी सुनाई. फिर गांव में जिसे पता लगा, वह सभी उसकी हंसी उड़ाने लगे.

लेकिन रामू पर किसी भी बात का कुछ असर नहीं पड़ा. दूसरा दिन सूरज निकलते ही वह घर से निकल पड़ा. रामू ने जब उस पेड़ के पास जाकर देखा, उसे से ना तो कोई गाय दिखाई दी ना ही गिरगिट. उसने सोचा कि गिरगिट कहीं घूमने फिरने गया होगा. चलो आसपास घूम कर देखते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने देखा कि – एक झाड़ी के नीचे बैठा गिरगिट अपनी मुंडी हिला रहा था. देखते ही रामू बोला – ला रे! मेरे पैसे दे.” फिर रामू ने उसकी ओर हाथ बढ़ाया तो गिरगिट पीछे सरका. रामू जरा और आगे बढ़ा तो गिरगिट अपनी बिल में घुस गया.

रामू ने सोचा कि शायद वह अंदर रुपए लेने के लिए गया है. थोड़ी देर प्रतीक्षा की. फिर वह उठा और अपने पास पड़ी एक लकड़ी से बिल को यह कहकर कुरेदने लगा – “चल भाई, चल, बहुत देर हो गई. मुझे पैसे दे दे, जिससे मैं घर जाऊं.
दो-चार बार कुरेदने से वहां उसे चांदी के सिक्के नजर आए. रामू ने समझा यह सिक्के गिरगिट ने भीतर से दिए हैं.

उसने एक एक करके 30 सिक्के गिन कर निकाल लिए. तभी वहां एक मटकी दिखाई दी. उसमें और भी सिक्के थे. लेकिन उसने केवल 30 सिक्के ही निकाले और बोला – “देख ले भाई, 30 रुपये लिए हैं.” रामू ने फिर से मटकी को मिट्टी में छुपा कर अपने घर की राह पकड़ ली.

घर जाकर सिक्को को अपनी पत्नी को देते हुए उसने सारा किस्सा अपनी पत्नी को सुनाया. उसकी सारी बातें एक पड़ोसी बड़े ध्यान से सुन रहा था. उस पड़ोसी ने लालच में सोचा कि मैं अभी जाकर वह मटकी ले आता हूं.

रात को वह उस जगह पहुंच गया जहां से रामू ने सिक्के निकाले थे. उसने धीरे-धीरे उस जगह की मिट्टी को हटाया. तो वहां उसे एक मटकी दिखाई दी. मटकी के अंदर जब उसने देखा तो उसमें उसे बहुत सारे बिच्छू दिखाई दिए. जैसे तैसे रामू के पड़ोसी ने मटकी को ढका.

फिर सोचने लगा कि रामू ने मुझे धोखा दिया है. और झूठ बोला है. यहां कहां सिक्के हैं? उससे बदला लेना चाहिए. यह मटकी उसके घर के छत पर से उसके ऊपर डाल देनी चाहिए. जब बिच्छू काटेंगे तो बचऊ झूठ बोलना भूल जाएगा.

यही सोचकर उस ने मटकी का मुंह अच्छी तरह बांधा और घर की ओर चल पड़ा. घर पहुंचने के बाद उसने रामू की छत की खपरैल को हटाकर मटकी का मुंह खोलकर बिच्छुओं को उड़ेल दिया. और फिर चुपचाप घर चला गया.

इधर रामू के ऊपर चांदी के सिक्के टपाटप गिर रहे थे, तो उसकी आंख खुल गई. उसने पत्नी को जगाया और बोला – “देख भागवान! ऊपर वाला जब भी देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है.”

शिक्षा – भगवान उतना ही देता है, जितना हमारी किस्मत में होता है. इसीलिए लालच नहीं करना चाहिए और परिश्रम करते रहना चाहिए.

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एक साधु और राजा की कहानी – Moral Kids Story in Hindi

प्राचीन समय की बात है अजबगढ़ नामक राज्य में कुबेर सिंह नाम का एक राजा राज्य करता था। Raja स्वभाव से बहुत ही दयालु था। वह गरीब और बेबस लोगों की हमेशा सहायता करता था। किसी गरीब पर जुल्म होते देख वह कड़ी कार्यवाही करता था। राजा के इसी स्वभाव से अजबगढ़ की प्रजा बहुत प्रसन्न रहती थी।  राजा की भी एक ही इच्छा थी कि वह अपनी प्रजा को हमेशा खुश रख सके। लेकिन फिर भी राजा को हमेशा ऐसा लगता था कि उसकी प्रजा खुश नहीं है।

इसीलिए अक्सर राजा प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए भेष बदलकर शहर में घूमा करता था, और लोगों की राय जाना करता था। इसी तरह एक बार राजा घूमते-घूमते शहर से बाहर जंगल की तरफ निकल गया। राजा के सभी साथी पीछे रह गए और वह एक जंगल में भटक गया। राजा ने अपनी चारों तरफ देखा कोई दिखाई नहीं दीया। वह भूख से व्याकुल था और शाम भी होने वाली थी। तभी राजा को एक ऋषि की कुटिया दिखाई दी। कुटिया देखकर राजा की जान में जान आई।

उसी समय राजा ने रात वहीं व्यतीत करने का फैसला किया। जब Raja ऋषि के आश्रम पर पहुंचा तो वहां पर एक ऋषि तपस्या में लीन थे और चारों तरफ बहुत ही सुंदर वातावरण था। चिड़िया चहक रही थी। पेड़ों से रस भरे फल लटक रहे थे और वातावरण बिल्कुल शांत प्रतीत होता था। राजा ने घोड़े से उतर कर ऋषि के समीप जाकर प्रणाम किया। ऋषि ने वह आवाज सुन कर आंखें खोली तो एक सुंदर नौजवान युवक को सामने पाया, जिसके मुख से तेज झलक रहा था। राजा को देखकर ऋषि सब कुछ समझ गए।

राजा ने ऋषि से रास्ता भटक जाने की बात बताई और वहां रात गुजारने के लिए अनुमति मांगी। ऋषि ने राजा को रुकने की अनुमति दे दी और राजा को खाने के लिए स्वादिष्ट फल दिए। जब राजा ने उन फलों को खाया तो राजा को वह फल अत्यंत मीठे और स्वादिष्ट लगे। राजा ने इससे पहले इतने मीठे फल कभी नहीं खाए थे। राजा ने ऋषि से फलों के इतने मीठे होने का कारण पूछा। राजा की यह बात सुनकर ऋषि ने कहा– “यहां का राजा दयालु और न्याय प्रिय होगा। वह गरीबों की सहायता करता होगा। वह प्रजा के दुख दूर करने वाला होगा। इसीलिए यह फल इतने मीठे है”।

लेकिन राजा को इन सब बातों पर यकीन नहीं हो पा रहा था। पर राजा इन बातों को झुठला भी नहीं पा रहा था। इसीलिए राजा ने निरीक्षण करने का निर्णय लिया। सुबह होते ही राजा शहर की तरफ निकल पड़ा और राजधानी में वापस पहुंचने के बाद उसने अत्याचार करना शुरु कर दिया। उसने प्रजा पर कर बढ़ा दिए। अब राजा गरीबों को परेशान करने लगा पूरे राज्य में हाहाकार मच गया। ठीक 1 महीने बाद राजा फिर उसी जंगल में उस आश्रम पर जा पहुंचा।

जब राजा ने उस आश्रम को देखा तो वह भौचक्का रह गया। क्योंकि जहां पर पहले पेड़ हरे भरे थे वह सब पेड़ सूख रहे थे। फलो में कीड़े लग रहे थे। चिड़ियां सीख रही थी। तभी घोड़े की आहट पाकर ऋषि अपनी कुटिया से बाहर आए और राजा को बिठाया। ऋषि ने राजा को ताजी फल खाने के लिए दिए। जब राजा ने फलों को खाया तो उसका पूरा मुंह कड़वाहट से भर गया। राजा ने ऋषि से फलो की कड़वाहट का कारण पूछा।

राजा किस बात का जवाब देते हुए ऋषि ने कहा– “अब यहां का राजा बदल गया है। जो प्रजा को दुखी करता है और प्रजा में कड़वाहट फैलाता है।  इसीलिए सभी फलों का स्वाद कड़वा हो गया है। यह सब देखकर राजा बहुत प्रभावित हुआ और ऋषि को प्रणाम कर वापस लौट आया। राजा ने अगले दिन से ही पहले जैसा राज्य चलाने लगा। वह फिर से लोगों की सहायता करने लगा और उसके बदलने से फलों और प्राकृतिक में फिर से स्वाद आ गया और प्रजा फिर से सुखी रहने लगी।

Story of Moral in Hindi :

इस कहानी का तात्पर्य यह है – “कभी किसी की जिंदगी में कड़वाहट नहीं घोलनी चाहिए अन्यथा उस कड़वाहट का असर आपको अपने निजी जीवन में देखने को मिलेगा। आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि जो दूसरों के लिए गड्ढे खोदते हैं ,वह उसमें स्वयं जाकर गिरती है”!!

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